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 जोनाई , निज संवाददाता , 17 नवंबर:--
धेमाजी जिले के जोनाई महकमा प्रशासन के तत्वावधान में और महकमा सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय के सहयोग से आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस का आयोजन महकमधिपति कार्यालय परिसर के सभाकक्ष में किया गया। जिसमें सभा की अध्यक्षता महकमा के सार्किल आफिसर और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रभारी अधिकारी  ऋतु पल्लव बरुवा ने किया। सभा की उद्देश्य व्याख्या सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उच्च वर्ग सहायक मंगल चंद्र बोडो ने किया। सभा में आमंत्रित अतिथि के रूप में मुरकंगसेलेक महाविद्यालय के अवकाश प्रार्चाय डॉ हराकांत पेगू , जोनाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विज्ञान विषय के शिक्षक प्रदीप गोगोई सहित जोनाई प्रेस क्लब के अध्यक्ष रोयल पेगु , सचिव मनोज कुमार प्रजापति , कोषाध्यक्ष अशोक कुमार पारिक , सदस्य क्रमश करबी दलै , गौतम पेगु , प्राणजीत दलै , सहित  सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निम्न वर्ग सहायक हितेश नाथ सहित अन्य कई कर्मचारी उपस्थित थे। सभा में मुरकंगसेलेक महाविद्यालय के अवकाश प्रार्चाय डॉ हराकांत पेगू  ने कहा कि आजकल संवाददाताओं को समाचार संकलन करने के दौरान भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उन्हें अधिक सुरक्षा देने पर जोर दिया । साथ ही श्री पेगु ने कहा कि मिडिया घरानों से उचित पारितोषिक  नहीं मिलने के कारण कुछ लोग गलत रास्ते चुन लेते हैं। सरकार से मिडिया घरानों से पारितोषिक प्रदान कराने की मांग किया।
सभा में जोनाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विज्ञान विषय के शिक्षक प्रदीप गोगोई ने कहा कि  समाज के विभिन्न समस्याओं को समाचार पत्रों और चैनलों में प्रकाशित कर समाज के लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया। मीडिया को समाज का दर्पण एवं दीपक दोनों माना जाता है। इनमें जो समाचार मीडिया है, चाहे वे समाचारपत्र हो या समाचार चैनल, उन्हें मूलतः समाज का दर्पण माना जाता है। दर्पण का काम है समतल दर्पण का तरह काम करना ताकि वह समाज की हू-ब-हू तस्वीर समाज के सामने पेश कर सकें। परंतु कभी-कभी निहित स्वार्थों के कारण ये समाचार मीडिया समतल दर्पण का जगह उत्तल या अवतल दर्पण का तरह काम करने लग जाते हैं। इससे समाज की उल्टी, अवास्तविक, काल्पनिक एवं विकृत तस्वीर भी सामने आ जाती है। सभा में जोनाई प्रेस क्लब के अध्यक्ष रोयल पेगु ने कहा कि प्रतिवर्ष राष्ट्रीय प्रेस दिवस का आयोजन सरकार करती है। मगर सरकार के द्वारा गठित मजीठिया वोर्ड के वेतन की बात उठाई जाती है तो सरकार चुप्पी साध लेती है। श्री पेगु ने कहा सरकार और मिडिया घरानों के मिलीभगत में मजीठिया वोर्ड के वेतन की मांग ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। साथ ही श्री पेगु ने कहा कि जब भी नेताओं के खिलाफ कोई पत्रकार आवाज उठाते है तो पत्रकार के विरोध में नेताओं द्वारा षंडयंत्र करने लगते हैं और सरकार चुप्पी साध लेती है। इस प्रकार राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाना कोई फायदा नहीं है।उल्लेखनीय है कि प्रथम प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी। परिणाम स्वरूप चार जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गई जिसने 16 नंवबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तब से लेकर आज तक प्रतिवर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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